Sahityasudha

साहित्यकारों की वेबपत्रिका

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वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

लेखक या सम्पादक की लिखित अनुमति के बिना पूर्ण या आंशिक रचनाओं का पुनर्प्रकाशन वर्जित है। लेखक के विचारों के साथ सम्पादक का सहमत या असहमत होना आवश्यक नहीं। सर्वाधिकार सुरक्षित। साहित्यसुधा में प्रकाशित रचनाओं में विचार लेखक के अपने हैं और साहित्यसुधा टीम का उनसे सहमत होना अनिवार्य नहीं है। साहित्यसुधा एक सम्पूर्णतः साहित्यिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य सभी रचनाकारों को प्रोत्साहित करके हिंदी को बढ़ावा देना है | इसके माध्यम से हिंदी साहित्य की सभी विधाओं को सम्मिलित करने का प्रयास किया जाएगा।

साहित्यसुधा

सम्पादकीय मंडल:-

सम्पादक - डॉ०अनिल चड्डा 

सह-सम्पादक - अखिल भंडारी  Akhil Bhandari

साहित्यिक समाचार



"स्टार हिंदी श्रेष्ठ सृजनकार सम्मान"

राष्ट्रीय कवि चौपाल एवं स्टार हिंदी ब्लॉग के संयुक्‍त तत्वाधान में "स्टार हिंदी श्रेष्ठ सृजनकार सम्मान" मार्च 2019 मे सर्व श्रेष्ठ आलेख, सृजन करने पर यह सम्मान पत्र एवं 500/-रुपये की धन राशि से राष्ट्रीय अध्यक्ष कासिम बीकानेरी, राष्ट्रीय प्रचारक कृष्ण कुमार सैनी,.....

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हिंदी ब्लॉगिंग में डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव के परिवार की तीन पीढ़ियाँ सक्रिय
हिन्दी ब्लॉगिंग ने पूरा किया 16 साल का सफर : 21 अप्रैल को बना था हिंदी का पहला ब्लॉग

न्यू मीडिया के इस दौर में सोशल मीडिया और ब्लॉगिंग लोगों के लिए अपनी बात कहने का सशक्त माध्यम बन चुका है। राजनीति की दुनिया से लेकर फिल्म जगत, साहित्य से लेकर कला और संस्कृति से जुड़े तमाम नाम ब्लॉगिंग से जुडे हुए हैं। 21 अप्रैल 2003 को हिंदी का प्रथम ब्लॉग ’नौ दो ग्यारह’ बना था, तबसे इसने कई पड़ावों को पार किया है। हिंदी ब्लॉगिंग के क्षेत्र में एक ऐसा भी परिवार है,......

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ऑनलाइन वीडियो काव्य सम्मेलन

साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा 22 अप्रैल 2019 दिन सोमवार को पृथ्वी दिवस विशेष ऑनलाइन वीडियो काव्य सम्मेलन रखा गया(दोहा मुक्तक) जिसमें छगनलाल गर्ग विज्ञ जी,शिवकुमार लिल्हारे अमन जी,अंजुमन मंसूरी आरजु जी,बाबा कल्पनेश जी,रवि रश्मि अनुभूति जी,राजेश कुमार तिवारी रामू जी,सरिता श्रीवास्तव जी,लता खरे जी,सरोज ठाकुर जी,अनिता मंदिलवार जी,सुमिता मूँधड़ा.....

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मानवता की प्रबल वकालत की है प्रदीप श्रीवास्तव ने :शिवमूर्ति

प्रदीप श्रीवास्तव की कहानियां नव उदारवाद, उदारवाद और भूमंडलीकरण की कहानियां हैं : हरिचरण प्रकाश



यूपी प्रेस क्लब, लखनऊ में 7 अप्रैल 2019 को प्रदीप श्रीवास्तव के कहानी संग्रह 'मेरी जनहित याचिका एवं अन्य कहानियां' पर एक परिचर्चा का आयोजन भारतीय जर्नलिस्ट परिषद,अनुभूति संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में किया गया . कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कथाकार श्री शिवमूर्ति ने कहा कि, 'सारे नियम कानून से ऊपर है मानवता और इस मानवता की प्रबल वकालत की है प्रदीप श्रीवास्तव ने लेकिन अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर वह देश की वसुधैव कुटुंबकम की भावना को पीछे छोड़ देते हैं.....

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संपादक की ओर से

“भिज्ञ-अनभिज्ञ”
      
कौन हूं? क्या हूं ?? कुछ ज्ञात नहीं
अज्ञात नाम ??? शायद अपना नहीं

जोड दिया गया है मेरे साथ
कहीं से उठा कर या फ़िर चुरा कर

अनजाना अस्तित्व,वस्तुत:स्थापना नहीं
पर पाऊं कहां स्वत्व अपना -
खोजता फिरता हूं यहां,वहां,जहां,तहां!

लगता है कहां - कहां से बीत जायेगा जीवन
आजीवन खोजता ही रहूंगा अस्तित्व अपना
बोध होगा अपनत्व मेरी रिक्ति का
दुनिया को जब, तब मैं न होऊंगा
होगा मेरा अस्तित्व -
पर मैं अनभिज्ञ ही रहूंगा!!
     - डॉ० अनिल चड्डा

अब तक

आपके पत्र



अनिल जी सादर प्रणाम

साहित्यसुधा जिन ऊँचाईयों को छू रही है इसके लिए आपको एवं संपादक टीम को बहुत बहुत बधाई ।अप्रैल द्वितीय अंक प्राप्त हुआ सभी रचनाकारों की अतिसुन्दर रचनाएं उन्हे बधाई |

लेकिन आपकी कविता जिंदगी ने ठग लिया ,डॉ कनिका वर्मा जी की कविता दो परिंदे बहुत अच्छी लगी एवं मनसाराम बैरवाल जी कविता झोंपङी की आग तो भाव विभोर कर देने वाली कविता है यदि इन्हे भावों के बादशाह की संज्ञा दी जाए तो शायद कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी |

लेखक व पाठक

रामदयाल रोहज
खेदासरी (राजस्थान)
ramdayalrohaj.rd@gmail.com

आदरणीय सम्पादक अनिल चड्डा जी

सादर प्रणाम ।

xxxxx आपकी पत्रिका सच में तारीफे काबिल है।

महोदय जी साहित्य सुधा का अप्रैल का प्रथम अंक को पढ़ा उसमे आपकी जो रचना है टूटना नहीं आदमी की जिंदगी के लिए एक दम सार्थक हैं । यदि दुनियां में हम आए हैं तो हमें तो चलना ही पडे़गा चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन रहें जो जिंदगी हर मसलों को एक घूंट दवा समझ कर पी जाए वही षोहरत की बुलंदी पर पहुंच सकता है। न हम किसी से डरें न हम किसी के आगे झुकें महोदय जी 14 लाईन की इस कविता में आपने जिंदगी की हर वो पहलु को लपेट दिए हैं जो हर इंसान के जिंदगी की आवष्यकता है। अपकी रचना अच्छी लगी । इस रचना से उन लोगों को जरूर लाभ होगा जो किसी काम को करने से पहले सोचते रहते हैं करें या न करें ।



आपका रचनाकार व पाठक
जयशंकर प्रसाद
jsp.tnr@gmail.com



डॉ अनिल चड्डा जी

नमस्कार !

पत्रिका साहित्य सुधा नियमित मिलती है। स्तरीय रचनाओं और सम्पादकीय के लिए आपको बधाई। हिन्दी प्रचार -प्रसार के लिए आपका अतुलित योगदान निःसन्देह सराहनीय है। आपके इस उम्दा प्रयास के लिए हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं।

सादर

रिया शर्मा
दिल्ली
adhikarime@gmail.com

सम्पादक के नाम एक पत्र

आदरणीय प्रणाम। आपकी पत्रिका में गुणवत्ता रचनाओं का चयन कर इन पौधों में सम्पादन की सिचाई कर सकारात्मक की खाद डालने के साथ नकारात्मक के कीड़ों से बचाने की सावधानी रखने से प्रकाशित रचनाओं से पाठक के मस्तिष्क को सुगन्धित ऊर्जा से महकते पुष्प एवं समाधान प्रस्तुत करने वाले मिठास से छलकते फल प्राप्त होते हैं। यही गुण पत्रिका की सफलता एवं सार्थकता का साक्षात् प्रमाण है।

साधुवाद।

सादर ------------------- एक पाठक ---
दिलीप भाटिया 372/201 न्यू मार्केट रावतभाटा 323307 राजस्थान मोबाइल फोन
नंबर 0 9461591498.

इस अंक में

गीत, गज़ल, इत्यादि

आलेख, कहानियाँ, व्यंग्य, इत्यादि

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