मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

डॉ सुशील शर्मा की किताबें विमोचित

गाडरवारा की माटी में कुछ बात तो है -नरेश जैन

विगत दिवस महावीर भवन गाडरवारा के सभागार में तीन दिवसीय साहित्यिक समागम समारोह के पहले दिवस में नगर के साहित्यकार डॉ सुशील शर्मा की चार पुस्तकें शब्द समन्दर (काव्य संग्रह ),माटी की महक (कथा संग्रह ),सुनो समय (आलेख संग्रह )एवं छंद का आनंद (छंदबद्ध कवितायेँ )का विमोचन मध्यप्रदेश तुलसी साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ मोहन तिवारी एवं श्री नरेश जैन वरिष्ठ साहित्यकार नरसिंहपुर ,श्री प्रकाश डोंगरे जी वरिष्ठ साहित्यकार नरसिंहपुर के मुख्य आतिथ्य में एवं गाडरवारा के वरिष्ठ साहित्यकार कुशलेन्द्र श्रीवास्तव की अध्यक्षता में तथा रोटरी क्लब के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर समाज सेवी मिनेंद्र डागा ,महंत बालक दास एवं हिंदी के प्रोफेसर डॉ जवाहर शुक्ल के विशिष्ट आतिथ्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर स्वागत भाषण में रोटरी क्लब के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर समाज सेवी मिनेंद्र डागा ने गाडरवारा की उर्वरा भूमि को पावन बताते हुए यहाँ के साहित्य के इतिहास को याद किया। गाडरवारा में कई वर्षों तक शिक्षक के रूप में अपनी महती सेवायें देने वाले वरिष्ठ साहित्यकार श्री नरेश चंद्र जैन ने कहा की गाडरवारा की माटी में कुछ बात तो है उन्होंने कहा की मेरे साहित्य जीवन का स्वर्णिम काल गाडरवारा में गुजरा है। वरिष्ठ साहित्यकार प्रकाश डोंगरे ने वर्तमान सन्दर्भ में साहित्य की दशा और दिशा पर प्रकाश डाला।

हिंदी के प्रोफेसर डॉ जवाहर शुक्ल ने वर्तमान परिपेक्ष्य में साहित्य को युवाओं को सही दिशा निर्देशन देने का उत्तम साधन निरूपित किया। महंत बालक दास ने कहा की सही संत तो साहित्यकार ही होते हैं जिनकी कलम लाखों भटकों को सही दिशा में मोड़ देती है।

डॉ सुशील शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि उनका साहित्य समाज के सरोकारों को प्रतिबिंबित करता है तथा साहित्य समाज और शिक्षा प्रतिक्रियात्मक संस्थान हैं एवं एक दूसरे को हमेशा प्रभावित करते हैं। मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश तुलसी साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ मोहन तिवारी ने डॉ सुशील शर्मा को एक सम्पूर्ण साहित्यकार निरूपित करते हुए कहा कि डॉ सुशील शर्मा ने हर विधा पर अपनी लेखनी को सिद्धहस्त किया है।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में नगर के वरिष्ठ साहित्यकार एवं इस समागम के प्रणेता कुशलेन्द्र श्रीवास्तव ने गाडरवारा के साहित्यिक इतिहास को ऐतिहासिक निरूपित करते हुए कहा कि गाडरवारा की उर्वरा भूमि की धरोहर को हम पुष्पित पल्ल्वित करके नई पीढ़ी को सौंपेंगे।

डॉ सुशील शर्मा के किताबों की समीक्षा राजेश गुप्ता द्वारा प्रस्तुत की गई ,पोषराज अकेला ने अपनी ग़ज़ल से सबको मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम का सफल सञ्चालन साहित्यकार विजय बेशर्म द्वारा किया गया एवं आभार प्रदर्शन राज्य अध्यापक संघ के प्रांतीय कोषाध्यक्ष नागेंद्र त्रिपाठी के द्वारा किया गया।

इस अवसर पर शहर के साहित्यप्रेमी ,पत्रकार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इससे पूर्व दोपहर को गाडरवारा अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष बसंत तपा द्वारा नरसिंहपुर जिले के साहित्यकारों की पुस्तकों की प्रदर्शनी का प्रारम्भ फीता काट कर किया गया इसमें वरिष्ठ साहित्यकार श्री नरेंद्र श्रीवास्तव,अधिवक्ता खान उपस्थित रहे।


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें