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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

कभी शबनम तो कभी क़यामत लिखो कोई

सलिल सरोज

लिखना है तो बादलों पे इबारत लिखो कोई कभी शबनम तो कभी क़यामत लिखो कोई कोहरों के बीच से रास्ता निकल के आएगा मंज़िलों के ख़िलाफ़ भी बगावत लिखो कोई फसलें नफरतों की सब कट जाएँगी खुद ही धरती के सीने पे ऐसी मोहब्बत लिखो कोई कितनी सदी तक यूँ ही पिसती रहा करेगी माँ के थके चेहरे पे अब राहत लिखो कोई तुम कहाँ गुम हो,किस ख़्यालात में गुम हो दो पल को अपने लिए चाहत लिखो कोई कुछ अनछुए पल, कुछ अनछुए अहसास दिल के करीब से बातें निहायत लिखो कोई


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