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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

क्रोध बुरी बला

गुर्जर विक्रमसिंह

रविवार का दिन था गुप्ता जी सुबह सवेरे ही तैयार होकर घर के बगीचे में गरमा - गरम चाय की चुस्कियों के साथ न्यूज पेपर की सुर्खियोंं पर नजर डाल ही रहे थे कि अचानक उनकी नजर अखबार के उस आखरी पन्ने पर पडी जिसे पढते ही मानों उनके पैरों तले जमीन ही खिसक गई थी आंखो को यह खबर पढकर यकीन नहीं हुआ तो फिर से चशमा उतार कर साफ करके फिर से उसे पढा परंतु यह क्या ये तो एकदम सत्य था।

जिस पर आंखोंं का यकिन कर पाना एकदम मुशकिल जान पडता था आखिर एसी तो कौन सी खबर गुप्ता जी ने अखबार के उस आखरी पन्ने पर पढी जिसने उनके होश ही जाफता कर दिए दर असल उन्हीं की कंपनी में काम करने वाले एक कर्मचारी रमेंश ने किसी कारण वश क्रोध में आकर अपनी पत्नी सुधा का कत्ल कर दिया और अब वह पुलिस की गिरफ्त में था यह खबर पढते ही गुप्ता जी के तो मानों होश ही उड गये थे उन्हें तो इस बात का बिल्कुल विश्वास ही नहीं हो रहा था कि इतने सीधे साधे दिखने वाले एक व्यक्ति ने क्रोध में आकर एसा गलत कदम उठा लिया उनकी तो मानों एक जोरदार चींंख ही निकल गई गुप्ताजी की जोर से चींख सुनकर उनकी पत्नी रमा दौडकर तुरंत घर से बाहर आई एंवम उन्होंने गुप्ता जी से इस प्रकार जोर से चींखने का कारण पुछा तो उन्होंने अपने कंपनी के उस कर्मचारी के बारे में बात करते हुए वे बोले कि यह रमेश तो बहुत ही सीधा साधा एंवम बहुत ही सरल स्वभाव का व्यक्ति था फिर आखिर उसने एसा खराब कदम क्यों उठाया होगा दफ्तर में भी उसका व्यवहार सबके प्रति बहुत ही सरल एंवम शांत था फिर एकदम यूं अचानक आखिर उसने एसा क्यों किया होगा।

इस पर उनकी पत्नी रमा ने उन्हें समझाते हुए बहुत ही सहज भाषा में उत्तर देते हुए कहा , क्रोध गुप्ताजी क्रोध यह क्रोध तो बडे से बडे एंवम छोटे से छोटे व्यक्ति की बुध्दि को भी कुंठित कर देता है और उसी क्रोध के वशीभुत होकर व्यक्ति ना चाहते हुए भी स्वंय अपना ही नुकसान कर बैठता है तो हर व्यक्ति को चाहिए कि भले ही कैसी भी कठिन परिस्थिति क्यों ना हो उसे सदा अपना मन शांत रखना चाहिए और कैसा भी निर्णय हो उसे "सौ " बार सोचकर ही हर निर्णय लेना चाहिए जैसा कि अभी आपने बताया कि आपकी कंपनी का यह कर्मचारी रमेश बहुत ही सीधे एंवम सरल स्वभाव का व्यक्ति था परंतु क्रोध में आकर उसने यह गलत एंवम बहुत ही भयानक कदम उठा लिया और स्वंय की ही पत्नी का कत्ल कर दिया बस यही होता है क्रोध सीधे साधे और बेहद ही सरल स्वभाव के व्यक्ति को भी " राक्षस" स्वरुप बना देता है चाहे फिर वह कोई साधारण व्यक्ति हो या कोई बडे से बडा तपस्वी ही क्यों ना हो इसलिए तो कहा गया है

" क्रोध बुरी बला है " पत्नी रमा की इन बातों को सुनकर उनका मन कुछ शांत हुआ और वे फिर से चाय की चुस्कियों के साथ न्यूज पेपर पढने का आनंद लेने लगे।


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