मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

प्यार के मायने

राजीव कुमार

तीन या चार बार पति ने फोन किया था। पति की हर बात में प्रेम और अकेलेेपन का एहसास होता था। इस बार भी फोन आया तो सीमा ने कहा ’’ पप्पू के पापा आप से एक महीना दूर रही तो आपकी ऐसी हालत हो रही है। आप से हमेशा के लिए दुर जाउंगी तो , आप तो मर ही जाएंगे। ’’

इस बात पर विनय सिर्फ खिलखिला कर हँस दिया। विनय की इस खिलखिलाहट ने भी सीमा को अमर प्रेम का एहसास कराया। सीमा की आँखों में आंसू आ गए, वो बोली ’’ आ रही हुुं बाबा, इतने बेचैन क्यों होते हैं? दो सप्ताह और रूकुंगी फिर आ जाउंगी , तबतक दिल की धड़कनें गिनते रहिए। ’’

आज एक महीना बाद सीमा, विनय के पास जा रही है। फोन पे कही हुई विनय की ढेर सारी बातें रह-रह कर उसके कानों में गंज रही है। पप्पू के हाथ में बिस्कुट पकड़ाकर खो गई यादों में। सीमा सोच रही है ’ अपने पति को मनाना हमको बहुत अच्छी तरह से आता है। मैं उनका मन पसंद खाना बनाकर खिलाउंगी। उनको पूरानी यादों में लेकर चलंुगी। उनसे ढेर सारा प्यार लुंगी और ढेर सारा प्यार दुगी। बस स्टेण्ड पहुचते ही, विनय का भाई सीमा का लगेज उठाकर अपने घर ले गया। सीमा म नही मन सोचने लगी कि वो पास आएंगे तो शिकायत करूंगी कि ’ आप क्यों नहीं आए हमको ले जाने? ’

सीमा विनय के पास खड़ी है। विनय कुछ बोले बिना सीमा को टकटकी लगाए देख रहा है। सीमा ने उत्सुकतावश, मन ही मन खुशीयों के ढेरों लड्डू फोड़ लिए है कि ’ अब मजा आएगा, सच्चे प्रेम को महसुस करन में। ’

विनय ने कहा ’’ कमीनी, इतने दिन मायके में मंह मार रही थी। गुस्से में आकर सीमा को धक्का दिया, सीमा पप्पू को लिए फर्श पर जा गिरी, उसपर नियय ने दो बेल्ट मार दिया। अमर प्रेम का कुछ भी अंश बांकी नहीं रह गया था। सीमा उसी स्थिति में पड़ी घंटो रोती रही। पप्पू भी बगल में रोता रहा।


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें