मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

याद

विज्ञा तिवारी "स्वयं"

ये स्याह रात फिर तेरी याद ले आयी अंजाने में वो तुझे मेरे पास ले आयी इन आंखों की दूरी विवशता ही थी ये चाहतों की अनोखी प्यास ले आयी रही कोशिश कि भूल जाऊं खुद को पर ये तो मेरा होश वापिस ले आयी एक फूल छिपा रखा था किताब में आज हवा वही ख़ुशबू साथ ले आयी तन्हाइयों में चांद से की थी जो बातें ये उन किस्सों का हिसाब ले आयी मेरी हर आस जैसे बस तुझसे जुड़ी हो क्यों ये ख़्याल वो अपने साथ ले आयी ये स्याह रात फिर तेरी याद ले आयी अंजाने में वो तुझे मेरे पास ले आयी


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें