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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

बच्चे

सुनील मिश्रा ' शोधार्थी'

अधनंगे बच्चें बचपन को ताख़ पर रखकर अकेलेपन से भरे नंगी दुनिया में बेआवाज बजती हुईं यातनाएओं में मरी हुई भाषा में बुदबुदाते बे- वजह गुमनाम जिंदगी की अफवाहों में पथ और पथिक मन-ही-मन में स्वयं की रंजिशो में डुबते व उतराते हुऐ अकुलाते बच्चे मां-बाप से कोसों दूर अनायास ही स्वयं में खोये हुऐ ....


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