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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

माँ और पिता

सिद्धार्थ कुमार

माँ मेरी शक्ति है,
पिता मेरा आत्मविश्वास है |
माँ से जीवन है,
पिता तो जीने का अहसास है ||

माँ तो निर्मल है कोमल है |
पिता तो निश्छल है कठोर है ||
माँ दुर्गा काली है |
पर सबसे ज्यादा संतोषी है||

पिता तो ब्रह्मा है विष्णु है |
पर सबसे ज्यादा महादेव त्रिनेत्री है ||
माँ अँधेरे में उजाले की छोटी सी दीया है |
पिता तो उजाले की माचिश की डिबिया है ||

मां तो चंदा मामा की शीतल छाया है |
वो हर परिस्थितियों को ढकती आँचल है ||
पिता तो सूरज चाचा सी तपती काया है |
कोयले को हीरा बनाती तपती ज्वाला है ||

माँ मेरी शक्ति है,
पिता मेरा आत्मविश्वास है |
माँ से जीवन है,
पिता तो जीने का अहसास है ||

मां तो हर हार की सांत्वना पुरस्कार है |
पिता तो फ़िर लडने का अभिप्राय है ||

मां हर जीत के बाद बहने वाली आँसू है |
हर पराजय के बाद मेरे चेहरे की मुस्कान है ||

पिता तो हर जीत के बाद मेरी सादगी है |
हर पराजय के बाद फिर लड़ने की शक्ति है ||

माँ तो खुशियों का खजाना है |
बिन मांगे मिले ऐसी काया है ||

पिता तो अलादीन का चिराग है |
परिश्रम से जीने का संवाद है ||

माँ सिद्धार्थ का अर्थ है |
पिता सिद्धार्थ का गुरुर है ||

माँ मेरी शक्ति है,
पिता मेरा आत्मविश्वास है |
माँ से जीवन है,
पिता तो जीने का अहसास है ||

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