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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

माहवारी

शिखा परी

माहवारी का पहला अनुभव और छोटी सी बच्ची वो डर के सहम के पिता और भाई से बचके नज़रें चुराते हुए कमरे में बैठी, सकुचाते हुए स्कर्ट से पैरों को ढकती हुई शांत थी, माँ ने चुपचाप बैठने को कहा ,रोने से मना किया, और सिसकने से बिल्कुल मना किया कितना बचती वो छोटी सी बच्ची ? बाज़ार में जब चलती है हरा, ग़ुलाबी, आसमानी पहनने से बचती है छुप - छुप कर नज़र बचा के चलती है सफ़ेद रंग के कपड़ों से बचती है बाज़ार में सैंकड़ों नज़रों से बचके चलती है बार बार पीछे दाग़ को ढूंढती है तानों से बचती है चाची से ताई से छुपती है चटाई पे लेटती है तीखा खाने से डरती है ये अजीब सी उलझन में उधेड़बुन में खोई थी मेरे साथ ही ऐसा क्यों? जवाब देने वाला कोई नहीं था गलती किसी की नहीं किसी ने उसे बताया ही नहीं कि ये वाले दाग अच्छे हैं। गर्व से कहो हम लड़कियाँ हैं। हाँ हर महीने मुझे दाग लगते हैं ....

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