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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

भारत में पाक मिला देगें.........

राज कुमार तिवारी

दहशत गर्दों की खैर नही, नापाक इरादे मिटा देगें अमन कहीं जो छीनेंगें, भारत में पाक मिला देगें कदम वीर सपूतों के, अब पीछे हटने वाले नही छुपकर वार जो करते हैं, शेर वो हमने पाले नही घर में घुस कर मारेगें, लाहौर हो या कराची हो तुम कीचड जहां उछालोंगे, हम कमल वहीं खिला देगें भारत में पाक मिला देगें........................ भंवर में अब तक फंसी जो थी, वो कस्ती बाहर आयी है असुरों की सियासत खतम हुई, अब राम ने लंका पाई है हीरे मोती अब जड़ना है, इसे और अभी चमकाना है डाका इस पर जो डालेगा, उसे लम्बी नींद सुला देगें भारत में पाक मिला देगें........................ लम्बी निशा में स्वर्गलोक था, विहान नया हम लाये हैं अब तक त्रास बहुत झेले हैं, ठोकर भी खूब खाये हैं इक इक वीर चट्टान बना है, उनसे मत टकराना तुम हद को पार करोगें तो, इस्लामाबाद हिला देगें भारत में पाक मिला देगें........................ केसर का खेत हमारा था, हल गैर वहां पे चलाते थे लहलहाती फसल हमारी थी, हमीं को वो डराते थे अब (राज) वहां पर मेरा है, तानाशाही अब चली गई आंखे अब भी खुली नही तो, हर रस्ता तुम्हे भुला देंगे भारत में पाक मिला देगें........................


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