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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

क्या तब?

राजीव डोगरा

तप्त अग्नि में जलकर राख हो जाऊंगा। एक दिन मिट्टी में मिलकर खाक हो जाऊंगा। तब मिट्टी को रौंदकर क्या मुझे याद करोगे? झूठे ख्वाबों की शायरी से क्या मेरा इंतजार करोगे? करना है इश्क़ तो अब कर सनम। लगा सीने से तस्वीर को क्या तब याद करोगे? उठाकर राख को मेरी क्या तब इजहार करोगे? लगा सीने से खाक मेरी क्या तब इकरार करोगे? मिलना है तो आज मिल सनम। मिट्टी में मिलने के बाद क्या खुदा से मेरे लिए फरियाद करोगे?


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