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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

काश्मीर

पुनीत कुमार पाण्डेय

वर्षो से ठहरी व विकृत जलधारा को, अविरल जलमाला बना लिया ! प्रकृति सुसज्जित भूखंड को, अखंड काव्य में समा लिया ! उस अद्भुत काव्य के संदर्भ को, मानसपटल पर सजा लिया। अपनो से बिछड़े अपनो को, सहृदय गले से लगा लिया! साधुवाद सभी कर्तव्य परायण मनुओं को, कलयुग में राम-भरत मिलाप करा लिया! वर्षो से ठहरी व विकृत जलधारा को, अविरल जलमाला बना लिया !

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