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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

मछलियाँ

पवनेश ठकुराठी 'पवन'

नाच रही हैं तालाब में सज-धजकर घूम रही हैं सागर में दूर-दूर तक खेल रही हैं एक्वेरियम में क्रिकेट मैच लोग देख रहे हैं उन्हें और वो देख रही हैं नदी-तालों से बाहर की दुनिया प्लीज ! जगाना मत उन्हें वो सो रही हैं अभी मांस विक्रेता की दुकान में विभिन्न मुद्राओं में।


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