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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

आजादी संग मनेगी राखी

कवि जसवंत लाल खटीक

क्या अजीब संजोग मिला है , आजादी संग मनेगी राखी । तभी दिल में एक प्रश्न उठा है , क्या आजादी अभी है बाकी ।। कलाई सजेगी राखी से और , तिरंगा गर्व से लहराएगा । भाई-बहन के प्रेम गीत और , हर व्यक्ति राष्ट्रगान गायेगा ।। भाई देगा वचन बहना को , मरते दम तक रक्षा का । तिरंगा भी कर रहा पुकार , अपने देश की सुरक्षा का ।। आजादी हम मना रहे है पर , इसके मायने भूल जाएंगे । दो दिन की देशभक्ति है ये , फिर पाप के रस्ते खुल जाएंगे ।। आजाद देश का कटु सत्य , सुरक्षित, बहु ना बेटी है । सिर्फ दो दिन लहराता तिरंगा , फिर इसकी जगह भी पेटी है ।। डर-डर कर जी रही बेटियां , जो राखी भाई के बांधती है । कैसे आजाद कहुँ में मित्रों , जब मर्यादा सीमा लाँघती है ।। अपनी बहन , बहन होती है , फिर दूसरी क्यूँ पराई है । क्यों खेलता हैं जिंदगी से , मूर्ख ! तू भी किसका भाई है ।। बलात्कार आम हो गए है , और हत्या भी कर लेते है । जीना दुश्वर हुआ बहनों का , तो क्यों आजाद भारत कहते है ।। बहनों जैसा हाल धरा का , वो भी घुट-घुट कर जीती है । आंतक और प्रदूषण से , रोज खून के आँसू पीती है ।। आम मनुष्य भी फंसा हुआ है , राजनीति के चक्रव्युह में । फिर कैसे आजाद है भारत , छल कपट के कलयुग में ।। इस आजादी के खातिर , जो हंसकर फाँसी झूल गए । राजनीति के नुमाइंदे सब , उन देश भक्तों को भूल गए ।। भूख के खातिर लटके रहे , किसान कर्ज से हार गए । कर्जमाफी का वादा कर , कुछ नेता धन डकार गए ।। मिलकर रहना आगे बढना , भारत देश की शान है । हम सब है रखवाले वतन के , भारत हमारी जान है ।। भाई-बहन के प्यार संग , आजादी का पर्व मनाएंगे । राखी और उपहार के संग , आजादी के गीत गाएंगे ।।


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