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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

यह कैसा परिवर्तन है

गरिमा

यह कैसा परिवर्तन है परिवर्तन प्रकृति का नियम है, यह कैसा परिवर्तन है, कहीं बार तो कहीं सूखा, प्रकृति का कहर जारी है। परिवर्तन अच्छा हो या बुरा, हम सब को झेलना है। राजनीति में भी परिवर्तन हुआ, कुछ अच्छा तो कुछ बुरा। कश्मीर में जो हुआ, वह परिवर्तन अच्छा है। घाटी में फिर रौनक लौटी, चंद्रग्रहण हट सा गया। अब ना हो कोई काली रात, हर तरफ उजाला फैला दो। सब सरकारों से कह दो, कोई दुल्हन विधवा होगी। कोई गाल पर मारेगा चांटा, तो उसको चाटा खाना होगा। बहुत हो गई गुलामी अब , आजादी का जश्न मनाना होगा। कश्मीर की सर जमी पर अब तो, हम सब मिलकर तिरंगा फहराएंगे। परिवर्तन की बात कर रहे लोगों को, हम सब यह बतलाएंगे। लोगों के चेहरे खिल गए हैं, यह परिवर्तन अच्छा है।।


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