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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

हाइकू

अशोक बाबू माहौर

1.

खामोश आँखें
लग रही दुखित
मन चिंतित

2.

शहर बड़ा
उमड़ रही भीड़
सड़क जाम

3.

थमी बारिश
रुक गया बहाव
पानी मटीला

4.

तेवर खूब
आँखें हो रही लाल
क्रोध बरसे

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