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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

किशन कन्हैया
(गीत -- सार छंद)

महेन्द्र देवांगन "माटी"

किशन कन्हैया रास रचैया , सबको नाच नचाये । बंशी की धुन सुनकर राधा , दौड़ी दौड़ी आये ।। बैठ डाल पर मोहन भैया, मुरली मधुर सुनाये । इधर उधर सब ढूँढे उसको , डाली पर छुप जाये ।। मधुर मधुर मुरली की तानें , सबके मन को भाये । बंशी की धुन सुनकर राधा, दौड़ी दौड़ी आये ।। छोटा सा है किशन कन्हैया , नखरे बहुत लगाये । उछल कूद करता हैं दिनभर , सबको बहुत सताये ।। हरकत देख यशोदा मैया , बहुते डाँट लगाये । बंशी की धुन सुनकर राधा , दौड़ी दौड़ी आये ।। चुपके चुपके घर पर आते , माखन मिश्री खाये । गोप ग्वाल सब पीछे रहते , लीला बहुत रचाये ।। लीला धारी कृष्ण मुरारी , कोई समझ न पाये । बंशी की धुन सुनकर राधा , दौड़ी दौड़ी आये ।।

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