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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

मजा दर्द में ही अब तो आने लगा

डॉ० अनिल चड्डा

मजा दर्द में ही अब तो आने लगा,
रह-रह कर गम है बुलाने लगा।

दोस्त भी देखे, दुश्मन भी देखे,
देखा अपनों का प्यार भी,
सभी कुछ हमको रुलाने लगा।

कोई दूर रहे या पास रहे,
हम किसी के न खास रहे,
शोर भी अब तो सताने लगा।

कहाँ से लायें खुशियाँ दो घड़ी की,
हँसी पर गम की परत चढ़ी थी,
अब गम भी हमको हँसाने लगा।


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