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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

कुछ हल निकलेगा

आनन्द सिंघनपुरी

कर तो लो कुछ हल निकलेगा। आज नही तो कल निकलेगा। मरुथल हो यदि सूखे -सूखे। खोदोगे तो जल निकलेगा। मुठ्ठी बाँध कमर कस ले जो । सत्कर्मों का फल निकलेगा। बह जाए यदि आँसू मेरे, तो आँखों से जल निकलेगा। दरिया मथ लो चाहे जितना । उतना ही दलदल निकलेगा। बेसुर गीतों को यदि गा लो, उसका स्वर भी चल निकलेगा।। दुनिया समझे थे बेगाना ना जाने पागल निकलेगा। कैसे जाने साथ मिला गर । खोटा सिक्का चल निकलेगा।।


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