मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

विदाई गीत
काढ़ी के बहिनिया चढ़ावऽ

विद्या शंकर विद्यार्थी

काढ़ी के बहिनिया चढ़ावऽ भइया, बहुते बिलंम होला हो काढ़ी के बहिनिया बिसारऽ भइया, अँखिया ना नम होला हो। उदसी के बोलऽताड़ी नन्ही मुनी चिरईंया तुलसी उदसली आ मतरिया अँगनईया नैना के पनिया निहारऽ भइया, छतिया दरद होला हो। सब कुछ सचल जाला सचल ना बहिनिया रोअताड़ी फफकी फफकी हो बहिनिया अँसुआ के पोंछऽ ना सम्हारऽ भइया, तोहरो धरम होला हो । सुखवा के दुनिया तजी के धिया जइहें सुखवे के दुनिया में गोतवा हो लगइहें बहिनी ना बहिनी पुकारऽ भइया, बहुते बिलंम होला हो।


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें