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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

नये जमाने का रोबोट

प्रमोद सोनवानी पुष्प

भैया देखो है यह रोबोट , जादू गजब दिखाता है। बटन दबाओ तो वह झटपट , करतब अपना दिखलाता है ।।1।। इधर-उधर वह घूम-घूमकर , काम निरंतर करता है । मेहनत करके खूब लगन से , सबकी सेवा करता है ।।2।। यह अपना प्यारा रोबोट , समय कभी न खोता है । नये ज़माने का यह रोबोट , मददगार कहलाता है ।।3।।

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