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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

जीवन

दीक्षा श्रीवास्तव

                 
जीवन में कुछ करना है तो मन मार के मत बैठो
आगे आगे बढ़ना है तो हिम्मत हार कर मत बैठो
चलने वाला ही मंजिल को पाता है
जो बैठा वह पीछे ही रह जाता है
ठहरा पानी भी एक दिन सड़ जाता है
बहता पानी निर्मल बन जाता है 	
पाँव मिले हैं चलने को पाँव पसारे मत बैठो
जीवन में कुछ करना है तो मन मार के मत बैठो
तेज दौड़ने वाला खरगोश दो पल बैठा हार गया
धीरे धीरे चलने वाला कछुआ देखो बाजी मार गया
चलो कदम से कदम मिला कर थककर किनारे मत बैठो
जीवन में कुछ करना है तो मन मार के मत बैठो
			

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