मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

भोजपुरी बालगीत
आव बदरी आव

देवेन्द्र कुमार राय

आव आव बदरी आव झूम झूम पानी बरसाव। सागर से जल भरि लाव आव बरीस लड्डू पाव, झम झम जब बरसी पानी सजी खेत चुनर से धानी, अब भादो के मति तरसाव आव आव----पानी बरसाव। उपजी धान गेहूँ हरिआइ चारो देने खुशियाँ छा जाइ, खेती से जब घर भरि जाइ दादी तोहरा के पुआ खिआइ, आव बनि धरती के संघाती एही खातीर हम भेजीं पाती, अब ना तनिको देर लगाव आव आव----पानी बरसाव। उपजी सगरो बांगर खादर करी सभे तोहरा के आदर, लहरी तल तलैया खेत होइ जब बदरा से भेंट, चारो देने जब बरखा होइ भारत से दु:ख चली पराइ, भारत के खेतिहर खेत पटाव आव आव---पानी बरसाव।

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें