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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 68, सितंबर(प्रथम), 2019

पेड़ लगाओ .....

डॉ० घनश्याम बादल

पेड़ लगाओ पेड़े खाओ , दादाजी ने मुझे बताया, कैसे पेड़े देंगें पेड़ ? नहीं समझ में मेरी आया । फिर सोचा अजमा ही लो- दादाजी की बात को , इसीलिए तो चार पेड़े , बोए चांदनी रात को । खोदा ,बोया, सींचा ,पाला, खाद लगाया, देखा -भाला, मगर एक न अंकुर फूटा , दादा को बतलाया झूठा । बीता बचपन, आई जवानी, मगर याद है अभी कहानी , बिन समझे कुछ भी करना , बच्चों होती है नादानी ... हां पेड़ों का पेड़ है जग में , पर केवल बुद्धि वाले पाते , बोएं खामखा पेड़े जो भी , अपने पेड़े वह गंवाते ...

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