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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

ख़ता कर ले..

सुरेंद्र सैनी बवानीवाल "उड़ता"

कुछ दिल का पता कर ले आजा मेरे संग ख़ता कर ले या कह ले ज़िम्मेदारियाँ हैं अपने कुछ फर्ज़ अता कर ले लम्बी पहाड़ सी है ज़िन्दगी कुछ हसीं लम्हें कता1. कर ले छीन लेना तो गलत बात है जो तेरा हक़ तू बता कर ले अजनबी से कौन रिश्ता रखे ज़रा अपना प्रेम जता कर ले "उड़ता" चरित्र बचाता चल बेशक़ कितनी हता2. कर ले 1.काट कर अलग 2.दुश्चरित्र नारी

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