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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

बात तो करो...

सुरेंद्र सैनी बवानीवाल "उड़ता"

वक़्त निकालकर मुझसे बात करो बड़ी आरज़ू है कभी मुलाक़ात करो बहुत तरस गयी हूँ तेरी शरारतों को कभी मेरे साथ कोई खुराफ़ात करो चलो तुम जीते, मैं तुमसे हार गयी इसे शय समझ लो मेरी मात करो तेरे इंतज़ार में चाँद को निहारती हूँ मेरा दिन बना दो,उजली रात करो मैंने हाल-ए-दिल कागज़ पर लिखा लफ्ज़ कलम, एहसास दवात करो मुझको नहीं रहना तेरे बिना "उड़ता" मुझे संग ले चलो पूरे जज़्बात करो.

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