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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

इसी ख्याल ने

सरफ़राज़ हेदायत

इसी ख्याल ने मुझे रंज में डाल रखा है। जो मेरा नही, उसीने सम्भाल रखा है। संग-दिल पे हुआ न कोई मेरा असर, उसने दिल का रास्ता बन्द कर रखा है। ताल्लुक क्या बनेगा मेरा उनके साथ, जाने कितनो से ताल्लुक बना रखा है। प्यार तो कोई शय हीं नही उनकी नजर में उन्होंने इश्क़ को तिज़ारत बना रखा है। प्यार की बिसात समझ नही पाए वो अभी जिन्हें सरफ़राज़ ने अपना बना रखा है।

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