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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

क्या होता

डॉ० अनिल चड्डा

तुम मिल भी जाते हमको तो क्या होता, वही होता जो मंजूर-ए-खुदा होता। मन में क्या रहे, जानता नहीं कोई, वही आता समझ, जो चेहरे पे लिखा होता। जरा सी बात भी लग जाती कभी बुरी, कभी जलालत का एहसास भी नहीं होता। वो लाख कोसें, लाख मजम्मत करें मेरी, मेरी अच्छाई पर असर इनका नहीं होता। कोई तो दोस्त बन कर भी निभाता दुश्मनी, कभी वो काम आ जाता, जो अपना नहीं होता।

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