मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

तू ही बता

डॉ० अनिल चड्डा

तू ही बता तुझे कैसे भुलाऊँ, गीत भी लिखूं तो कैसे मैं गाऊँ। सावन की जब लगी झड़ी हो, दिल का सूखा मैं कैसे मिटाऊँ। बीत जाती रात आँखों में सूनी, सपनों के लिए भी मैं सो न पाऊँ। तुझ बिन सो गए सारे अरमान, सोये अरमानों को मैं कैसे जगाऊँ। अंधेरों का शौक है अब इतना बढ़ा, उम्मीद का दीया मैं कैसे जलाऊँ।

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें