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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

गुरु

अमर'अरमान'

एक व्यक्ति जो हमें अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाता है,हमें जीने का सही मार्ग दिखाता है।ऐसे व्यक्ति के लिए गुरु,अध्यापक,आचार्य, मास्टर,अतालिक़ आदि शब्दों का प्रयोग किया जाता है। किंतु ऐसा महान रचना कार जो कुम्हार की भांति गढ़ -गढ़ कर व्यक्ति के अंदर के सारे खोटों को दूर कर उसे पाक़ और पावन बना देता है।क्या ऐसे महापुरुष के महत्व को किसी एक शब्द में पिरोया जा सकता है? शायद नहीं!

गुरु जैसे पाक पुरुष की पुनीत महिमा को एक निश्चित रंग-रूप या आकार में बाँध पाना शब्दों से परे है।जगत में किस मोड़ पर,किस रूप में हमारा गुरु से साक्षात्कार हो जाये यह कह पाना मुश्किल ही नहीं असंभव भी है।माँ -बाप, भाई -बहन,सखा -सहचरी,शिशु-व्यस्क,प्रकृति या किसी अन्य रूप में,कोई भी ऐसा प्राणी या तत्व जिसके व्यवहार या आचरण से सत्य या कर्तव्यों का बोध हो जाए वहीं हमारे लिए गुरु कहलाता है।

दुनिया में जितने भी महापुरुष हुए हैं उन सब की महानता में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से गुरु की प्रेरणा का असर रहा है।फिर चाहे साक्षात ज्ञान के प्रकाश पुंज महात्मा बुद्ध हो,ज्ञान के शिखर पुरुष बाबा साहब हो,सर्व सम्पन राष्ट्र के राष्ट्राप्रमुख अब्राहिम लिंकन हो आदरणीय क़लाम जी हो या फिर सात वर्ष के उपगुप्त (कौंड़ल्य) से बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने वाले चक्रवर्ती महान सम्राट अशोक हो या कोई भी अनन्य महापुरुष ही क्यों न हो।ये सब गुरु की प्रेरणा के द्वारा ही अपने आप को ध्रुव तारे की भांति संसार रूपी नभ में स्थापित कर पाने में सफल हो पाए हैं।

वास्तव में देखा जाए तो जिस किसी से भी हमें व्यवहारिक,धार्मिक, राजनीति के अलावा भी जो कुछ भी सुचितापूर्ण सीखने की प्रेरणा मिले वही हमारे लिए असल गुरु होता है।जीवन को ज्ञान और विवेक रूपी अद्भुत और जादुई तोहफा देकर जीवन को नया आयाम देने वाले ऐसे ईश रूपी गुरु का ऋण चुका पाना कभी भी संभव ना होगा। जीवन को सतरंगी खुशियों का उपहार देने वाले ऐसे समस्त गुरुओं को मैं शत-शत नमन करता हूँ।


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