मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

यही है ख़ुशी-------

वीरेन्द्र कौशल

वो ज्यादा में भी दु:खी हम कम में ही सुखी यही है ख़ुशी------ वो अपनों में भी दु:खी हम ग़ैरों संग ही सुखी यही है ख़ुशी----- वो बिन कारण भी दु:खी हम कारणों संग ही सुखी यही है ख़ुशी------- वो हर बात में भी दु:खी हम हालात में ही सुखी यही है ख़ुशी------- वोह औरों के सुख से भी दु:खी हम हर दुःख में ही सुखी यही है ख़ुशी ------ वो पैसा होते भी दुःखी हम कंगाली में भी सुखी यही है ख़ुशी------- वो ऐशो आराम में भी दुःखी हम झंडूबाम में ही सुखी यही है ख़ुशी------- यही है ख़ुशी------ यही है ख़ुशी-------


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें