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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

बारिश और बूंदे .......

वीरेन्द्र कौशल

बारिश और बूंदे कुछ तो चाहत ज़रूर ही रही होगी इन बारिशों की बूंदों की भी भले ही किसी मज़बूरी कारण य़ा वक्त के किसी ऐसे पहलू को लेकर कि किसी ख्वाब को बदलना होगा हकीक़त में कि किसी का भला हो वरना कौन गिरना चाहता इस ज़मीन पर वो भी तब ज़ब एक बार आसमान तक का सफर बख़ूबी तय किया हो ..." बारिश और बूंदे. ...


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