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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

जिंदगी एक सफर है

रमिला राजपुरोहित

जिंदगी एक सफर है यहां कल की ना कोई खबर है॥ मौजूद हर इंसान यहां पर खुद से बेखबर है यही है जिंदगी॥ २॥ जिंदगी का एक ही मकसद है यहां पैसों की ही खनक है॥ जिसको भी यह मिले बस वही दुनिया में अमर है यही है जिंदगी॥ २॥ यहां अपने ही लूटते हैं गैरों में कहां दम है॥ स्वार्थी बन रही दुनिया बस अपनी खुशी में ही मग्न है यही है जिंदगी॥ २॥ या चेहरे देती है सौगातें रूप के साथ चल रहा वक्त है॥ काबिलियत की कोई कीमत नहीं रुपयों में डूब गया हर शख्स है यही है जिंदगी॥ २॥ विदेशी बनता जा रहा क्यों हमारा भारत वतन है॥ अंग्रेजी का उपयोग इतना कि हमारी संस्कृति हो रही खतम है यही है जिंदगी॥ २॥ आजकल नफरत है इतनी भरी की आग की जलन भी कम है॥ हमले में खून की होली खेली हर मासूमों के मन से यही है जिंदगी॥ २॥ आज हम यहां मौजूद है पर कल शायद ना रहे॥ तो जिंदगी में कुछ ऐसा करें जो सबको याद रहे यही है जिंदगी॥ २॥


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