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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

दीमक

राजेश’ललित’

दीमक लगे रिश्ते हाथ लगाते चौखट टूटी दरवाज़े खिसके बाँबी टूटी सब कुछ मिट्टी हो गया हरे पेड़ के पते सोख कर उर्जा सह न सके हवा की चुभन झड़ गये पते पतझड़ के आते टूटे सब रिश्ते नाते ठूँठ रह गया बाग़ के बीच निहारता हरियाली


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