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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

हिंदी दिवस विशेष:
दो कविताएँ

पवनेश ठकुराठी

१. हिंदी का प्रसार करें
हिंदी मातृभाषा है, इसका ना तिरस्कार करें। सब मिलजुलकर इस भाषा का आओ हम प्रसार करें। लेखनी में हिंदी हो हो वाणी में हिंदी। हिंदी हो जन जन के माथे की अब बिंदी। हिंदी राजभाषा है इसका ना बहिष्कार करें। सब मिलजुलकर इस भाषा का आओ हम प्रसार करें।
२. प्यारी है हिंदी भाषा
सुनो दोस्तों, सुनो साथियों, न्यारी है हिंदी भाषा। मुझको अपनी जां से भी, प्यारी है हिंदी भाषा। हिंदी हमारी माता है, माता से बढ़कर दूजा नहीं। अपनी भाषा को अपना समझो, इससे बढ़कर कोई पूजा नहीं। सुनो दोस्तों, सुनो साथियों, न्यारी है हिंदी भाषा। मुझको अपनी जां से भी, प्यारी है हिंदी भाषा। साहित्य अनौखा है इसका, इसका अनौखा है संसार। इसमें लगालो तुम गोता, हो जाओगे भव से तुम पार। सुनो दोस्तों, सुनो साथियों, न्यारी है हिंदी भाषा। मुझको अपनी जां से भी, प्यारी है हिंदी भाषा। हिंदी भारत का गौरव है, इसका सभी सम्मान करें। इसके सम्मान से ओ प्यारे, भारत पर अभिमान करें। सुनो दोस्तों, सुनो साथियों, न्यारी है हिंदी भाषा। मुझको अपनी जां से भी, प्यारी है हिंदी भाषा।

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