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Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

कुर्बान न कर दें हम कहीं

मोहिन्द्र कुमार शर्मा

घर घर घर घर दीप जलें हैं, घर घर बज रही शहनाई ढोल नगाढे की ध्वनि से, नाच रहा मन मेरे भाई । घर घर अंग्रेजों ने डाके डाले, घर घर डाली फूट और साथ में कर दिया, हमारे पूर्वजों को शूट । भारतीय शिक्षा उन्होंने उजाडी, और उजाडा कारोबार बसाया फिर अपना व्यापार , कर दिया भारतीयों को बेकार । अंग्रेजों के जुल्मों सितम का, जब रहा न पारावार झूल गए सूली पर वे, सब कुछ अपना वार । जहां कैद थे लोग , वहां गुलामी हुई गिरफ्तार, आजादी के दीवानों के ,सपने हुए साकार । अमर शहीदों की याद में, तिरंगा हम लहराते जाते, रंग दे बसंती चोला , उसी लय ताल में गाते जाते । आज आजादी को मिले , हुए वर्ष चौहतर, हम लोगों ने कर लिया है चहुमुखी विकास । लेकिन आज भी आधे गरीबी रेखा से नीचे हैं, शिक्षा रोजगार और विकास में वे सबसे पीछे हैं। इस एकतरफा विकास का आत्मघाती परिणाम होगा, इन्हें जगाकर ही वास्तविक समाज कल्याण होगा । हम अगर सचेत न रहें , व ना रखेंगे ध्यान , तो हो सकता है फिर से हमारा भारत गुलाम । जी जान से करेंगे मेहनत , देश का भविष्य नौजवानों की हिम्मत । भ्रष्टाचार ,बेरोजगारी ,अनपढता का है करना खात्मा, तभी देश की सबल रहेगी आत्मा । अमर शहीदों की कुर्बानी को ,रखना याद मेरे भाई, आज उनकी याद में , बजाना न भूलना शहनाई । देश हित के काज , वे तो चले कुर्बानी की डगर । कुर्बान न कर दें हम कहीं ये सभ्यता ये नगर ।


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