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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

वक़्त तुम्हारा भी होगा

लवविवेक मौर्या

वक़्त तुम्हारा भी होगा ये लोग तुम्हारे भी होंगे जब नाम तुम्हारा होगा ये पल सुनहरे भी होंगे तुझको चलना है,आगे बढ़ना है हर पल वक़्त से तुझको लड़ना है कोशिश करते रहने से,कोशिश करते रहने से पास तेरे मंजिल के द्वारे होंगे चलते रहना जिंदगी है कर्म से अपने दिल्लगी है बंदिश कितनी भी हो हमपे चाहे तोड़ के उनको पैर हमारे जमीं पर होंगे पंख लगा के उड़ना तू खुद समय के साथ संवरना तू नील गगन में देखना फिर सफलता से भरे सारे सितारे तेरे होंगे


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