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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

मैं एक शिक्षक हूँ, शिक्षा देना मेरा काम

कमलेश कुमार शर्मा "कमल"

गुरुजी ,अध्यापक, मास्टर ये भी मेरे नाम। मास्टर होते कंजूस, ऐसे नाम से भी बदनाम।। चाहे लाख काम करो, किसी को नहीं दिखता है। संतुष्टि के लिए रोज, डायरी में लिखना पड़ता है।। गर्मी हो या बरसात या कड़ाके की हो सर्दी। ड्यूटी पर तैनात रहता, नहीं किसी को हमदर्दी।। MDM का स्वाद चखो, दूध में ना हो पानी। बावर्ची बने कभी, कभी ग्वाले सी कहानी।। हर विपदा में साथ खड़ा, बनकर कर्मयोगी। मेहनत से बनता है, सरकारी वेतनभोगी।। योजनाओं की कमी नहीं, आदेश रोज नए आते हैं। सब काम छोड़ कर पहले, डाक तुरंत मंगवाते हैं।। पाठ पढ़ाओ, जाँच करो, लो फिर उसका एग्जाम। रिजल्ट कम आने पर, भुगतो फिर उसका परिणाम।। जनगणना या चुनाव हो, कितने आधार और खाते हैं। वृक्षारोपण, छात्रवृति, स्कूटी, सर्वे में घर घर जाते हैं।। शिक्षक ने बाबू , BLO, कभी चौकीदारी का काम किया। संकट की इस घड़ी में भी, शिक्षक ने योगदान दिया।। पगार कम हो या ज्यादा, ये कर्मों का फल होता है। वैसा ही पाता फल सदा, जो जैसा बीज बोता है।। शिक्षक बनकर हमने, नहीं कोई अपराध किया। धन्य है ईश्वर जो हमको, गुरु पद का सौभाग्य दिया।। फिर भी अपने कर्म को, देता रहूँगा अंजाम। मैं एक शिक्षक हूँ, शिक्षा देना मेरा काम।।

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