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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

हिंदी हिंद की माता

अमर'अरमान'

हिन्दी हिन्द की माता,पिता संविधान है हिंदी से ही मिलती,जगत में पहचान है। मस्तक सोहे बंगला,ये तिलक समान है उर्दू से मिलकर के,बढ़ जाए इसका मान है। उड़िया इसका जीवन,तमिल इसकी जान है हिंदी हिंद की माता,पिता संविधान है। संस्कृत से जन्मी,लगे दुहिता सामान है कश्मीरी में बसते,हिंदुस्तानी प्राण हैं। पंजाबी मिल बनती,हरियाणा की शान है कन्नड़ की सुपारी,बन जाए मीठा पान है। तेलगु से मिलकर,बन जाए मीठी तान है हिंदी हिंद की माता,पिता संविधान है। संथाली है रग में,तो मैथिली पहचान है नेपाली है गौरव,तो कोंकणी अभिमान है। हिंदी सँग सिंधी का,होता गुणगान है गुजराती है जीवन,ना समझो मेहमान है। मिले जाये जब मराठी,तो होता ग़ुमान है हिंदी हिंद की माता,पिता संविधान है। अधर्मी का दुश्मन,मज़लूमों का यार है हिन्दू-सिक्ख ईसाई,सभी से इसे प्यार है। बहनो के गले में,ये आज़ादी का हार है सभी को दिलाया, समता का इसने सार है। सभी को हक़ दिलाता,दिलाता अधिकार है हिंदी हिंद की माता,पिता संविधान है।

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