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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

कुछ पीड़ा के चित्र घनेरे

डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी

कुछ पीड़ा के चित्र घनेरे, उर के पट पे आज उकेरे। मेरे दुख की रात न बीती, जग में आये रोज सवेरे । मन की मीन बहुत उलझी है, डाल न चारा , समय मछेरे ! एकाकी पथ नाप रहा हूँ, बागी निर्णय थे सब मेरे । दीप अकेला कब तक लड़ता, दुश्मन थे हर ओर अंधेरे । मुझसे उत्तर माँग रहे हैं, प्रश्न खड़े हैं मुझको घेरे।

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