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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

सावन के हाइकु

डॉ०महिमा श्रीवास्तव

(1) वर्षा की बूंदें विरहन झुलसे चातक हंसे (2) घनेरे मेघ चमकती दामिनी लौटें वो कब (3) झरे सावन कहां मनभावन भीगा सा मन

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