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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

हाइकु

अशोक बाबू माहौर

1. खामोश वह इधर भाग दौड़ सड़क चौड़ी । 2. सूना नगर पेड़ पौधे बिखरे जैसे सपना । 3. रात अंधेरी डरावना जंगल पास में घर ।

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