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Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

अंधकार जा भाग

डॉ० अनिल चड्डा

अंधकार जा भाग, भोर अब होनी आई किरण तेरी छाती चीर,रोशनी की। विहग करें कलरव नीड़ अपने से, फूल खिले, मुस्काये तरु धीरे से, पत्ता-पत्ता गाये गीत धीरे से हिल के, चिड़ियों ने संगीतमय बोली है बोली। अंधकार जा भाग, भोर अब होनी।। अंगड़ाई लेता जीवन अब हर पथ पर है, उदय हुआ सूरज, किस बात का डर है, द्वार दिए हैं खोल सबने अपने आंगन के, खुश हो धरती गाये अब गीत मिलन के। अंधकार जा भाग, भोर अब होनी।।

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