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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

कुकुभ छन्द गीत

रीना गोयल

कोरोना से छिड़ी भयंकर,जंग जीत ही जायेंगे । अभी ज़रा विचलित हैं लेकिन,कब तक यूँ घबरायेंगे ।। 🙏🙏🙏🙏❣️❣️🙏🙏🙏🙏 मानवता के शुक्ष्म शत्रु का,छद्म रूप दिखलाना है । है सवार संकल्प शीश पर,अब पाषाण गलाना है । उग्र ज्वाल यदि हृदय भरेंगे, नष्ट तभी कर पाएंगे ।। कोरोना से छिड़ी भयंकर........। 🙏🙏🙏🙏❣️❣️🙏🙏🙏🙏 रख कर दूरी भीड़-भाड़ से, कहीं नहीं आएं जाएं । अभिवादन हो हाथ जोड़ कर,ना मिले न गले लगाएं। अब सख्ती से अनुशासन के,नियम सभी अपनाएंगे ।। कोरोना से छिड़ी भयंकर ......। 🙏🙏🙏🙏❣️❣️🙏🙏🙏🙏 हमें बढ़ानी है प्रतिरक्षा, नित्य योग व्यायाम करेंगे । संक्रमण पर विजय प्राप्त कर,नहीं रुग्ण असमय मरेंगे । स्वच्छता को हथियार बना हम,भारत देश बचाएंगे ।। कोरोना से छिड़ी भयंकर .......। 🙏🙏🙏🙏❣️❣️🙏🙏🙏🙏 सार समझ लो श्वास-श्वास का,बंद करो नित मनमानी । हां!बचाव में ही इलाज यह ,बात समझ ले हर प्राणी । कब तक घेरेंगी विपदाएं,दिन यह भी टल जाएंगे ।। कोरोना से छिड़ी भयंकर .......।

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