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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

गणेश वंदना
(छंद पकैया)

प्रिया देवांगन "प्रियू"

छन्न पकैया छन्न पकैया , बाल गणेश पधारे। मूषक ऊपर सवार करके , आये मेरे द्वारे।। छन्न पकैया छन्न पकैया , बच्चे उनको भाये। सबके घर में जा जा कर के , लड्डू मोदक खाये।। छन्न पकैया छन्न पकैया , सब को विद्या देते। छोटे नटखट बाल गणेशा , कभी नही कुछ लेते।। छन्न पकैया छन्न पकैया , गौरी पुत्र गणेशा। माता जी है पार्वती और , पिता जी है महेशा।। छन्न पकैया छन्न पकैया , सबके संकट हरते। जो भी मांगे सच्चे मन से , झोली उसके भरते।।

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