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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 93,सितम्बर(द्वितीय), 2020

दो गजलें

विद्या शंकर विद्यार्थी

1. आँख उनका बदे बहल बाटे दिल तरे से चुपे सहल बाटे लोग तरे से इहाँ जरा देला बात जानल कुल्ही बुझल बाटे चार दिन का रहल अंजोरा बा भीत भीतर रहल ढहल बाटे आग सुनुगल धुआँ उठल बाटे आँख से मोती इहाँ बहल बाटे प्रीत से खेल लोग बा खेलल चोट पर चोट दिल सहल बाटे । 2. बात हरदम चला गइल जिनिगी नून अइसन गला गइल जिनिगी सोच के कुछ तरे हुलस जागल पेंड़ के जर हिला गइल जिनिगी बात से राह टोह लेंलीं हम धूर माटी मिला गइल जिनिगी दोष उनकर कहीं कि आपन दीं काँट हरदम खिला गइल जिनिगी जात में कुछ महल अटारी में घात कर धर गिला गइल जिनिगी।

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