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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 95,अक्तूबर(द्वितीय), 2020

बड़ा डॉक्टर

शुचि 'भवि'

"अरे यार राहुल,तेरे जैसा भोंदू नहीं होगा कोई,हम लोग तो लायक़ ही नहीं थे मगर तू तो यार ,लायक़ होकर भी नालायक़ ही निकला।एम्स की सीट छोड़ इस मामूली से मेडिकल कॉलेज में पड़ा है।"

राहुल को तो मानो अब ऐसी उलाहनाओं की आदत पड़ चुकी थी।वह बताता भी तो क्या,और किस-किस को,और क्या समझ भी पाता कोई?

राहुल की चुप्पी उस दिन टूटी जब यही प्रश्न उसके जिगरी दोस्त ऋषि ने किया।

राहुल के जन्म के पूर्व की थी जो घटना, कई बार सुनी थी राहुल ने भी, मगर समझ अब पाया था वो,ऋषि को बताने लगा।

"मेरे पिताजी उस वक़्त अविवाहित थे जब मेरे चाचा का आई.आई.टी. के लिए सेलेक्शन हुआ था,पूरे खानदान सहित शहर भी हर्षित था।मगर कोई यह नहीं जानता था कि इस सेलेक्शन के साथ ही दादी के दुखों का भी सेलेक्शन हुआ था।चाचा का दाखिला कराके दादाजी को लौटे अभी पंद्रह ही दिन हुए थे और एक फ़ोन कॉल ने मानो ग्रहण ही लगा दिया था,ख़ुशियों पर।चाचा की लाश लेकर लौटे थे दादा और पापा,वजह केवल चाचा का संस्कारहीन नहीं होना था जो किसी के अहम को इतना ठेस पहुँचा गया था कि चाचा को ही ले गया।रैगिंग में एक अनजान लड़की की ढाल बन गए थे चाचा,और रैगिंग के नाम पर हो रही अभद्रता को रोके थे, जिसका ख़ामियाज़ा उनके सीनियर्स ने उनकी जान ले कर लिया था।दादी लगभग पाँच साल तक, इस घटना के बाद, नींद की गोली पर ही सोती थीं और सदमा इस हद तक था कि हर एक को यही सलाह देती थीं कि बच्चों को होस्टल मत भेजना,कभी वापस नहीं आते वहाँ से वे।"

इतना कहकर राहुल रुक गया था, फिर अचानक बोला था , "ऋषि, दादी ने मेरे सेलेक्शन पर बहुत बड़ी पार्टी रखी घर पर,और सबके समक्ष मुझसे बस इतना कहा था,"राहुल, दादी को बस निश्चिंत बुढ़ापा दे दो, हॉस्टल मत जाओ।ऋषि, 25 साल पहले की घटना 25 दिन भी पुरानी नहीं हुई है अब तक दादी के लिए,दादी का पल पल का डर मैंने जिया है उनके साथ,जब भी गली-मुहल्ले का कोई बच्चा बाहर पढ़ने जाता था।घर में सबने ही आग्रह किया मुझसे कि मैं हॉस्टल चला जाऊँ, दादी को वो लोग सँभाल लेंगे,मेरे करियर का सवाल है,मगर ऋषि ये बता यार घर के मरीज़ को मारकर मैं डॉक्टर बन करोड़ों को भी बचा लूँगा,नाम कमा लूँगा मगर दादी,उन्हें कैसे पाऊँगा?"

"तू तो डॉक्टरी की पढ़ाई से पहले ही इतना बड़ा डॉक्टर बन गया है राहुल,न मालूम ये रैगिंग का राक्षस और कितनी योग्यताएँ निगलेगा", इतना कहकर ऋषि ने राहुल को गले से लगा लिया।


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