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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 95,अक्तूबर(द्वितीय), 2020

हैवानियत

रेखा पारंगी

कब तक आखिर होता रहेगा मां बाप की दुलारी नोंची जाएगी? आखिर कब तक इंसान हैवान रहेगा कब महफूज़ बेटियां सड़कों पर रहेगी? नहीं चाहिए यूं चकाचौंध सड़कें, क्यूं आखिर मौन है,क्यूं जनता नहीं भड़के? कहां गए , मीडिया और सरकार क्यूं छाप कर बासी हो गया अखबार? चर्चित खबरें और गॉसिप,बस यही रोना एक बेटी की आबरू और ,घायल मन का कोना क्यों नहीं है मिलती सज़ा ,बनता कोई कानून कुछ दिन उग्र, फिर क्यूं हो जाता शांत जुनून कुछ दिन मोमबत्ती जलाकर , क्या होगा सख्त कानून और सबक दरिंदों को देना होगा आज मेरी लेखनी मौन है, मनीषा के दर्द से हृदय द्रवित हो उठा, और मन घायल हैं इससे। नहीं चाहिए दो आंसू और हमदर्दी के बोल अब तो ऐसा हो बलात्कारी को मिले सजा और खुले पोल। नहीं करनी सड़कों पर भीड़ और धरना प्रदर्शन बस दे दो हाथ हथियार और दरिंदों को सौंपै जनता हाथ।


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