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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 95,अक्तूबर(द्वितीय), 2020

सुनो !

राजीव डोगरा 'विमल'

सुनो ! मैं फिर से लौट कर आऊंगा, मिट्टी नहीं हूं जो उड़ गया। तूफ़ान हूं फिर से थरथराता आऊंगा। सुनो ! जीवन पथ पर तुमने मुझे कभी कुछ नहीं समझा मगर वक्त के पन्नों पर लिखा है साथ मेरा तेरा मैं फिर से तुम्हें अपना बनाने आऊंगा। सुनो ! बहुत रुलाया है तुमने मुझे बात-बात पर पर तुम भी लौट कर आओगे एक दिन पलके भीगाकर।


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