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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 95,अक्तूबर(द्वितीय), 2020

बनेगी

नरेश गुर्जर

पत्थरों को तरासोगे तो मूर्त बनेगी ज़िन्दगी को तरासोगे खूबसूरत बनेगी मेहनत करके‌ पानी पिया करो दोस्तों सितारों की चाल से ना कोई मुहूर्त बनेगी ज़िन्दगी अपनी है तो कर्म भी करने होंगे उधार की आदत कल जरूरत बनेगी हौसले सलामत है तो किस बात का डर बुलंदियों की गवाह ख़ुद कुदरत बनेगी ऊच विचारों से बनते हैं महान व्यक्तित्व याद रखों साफ पानी में ही सूरत बनेगी

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